ताजमहल, श्वेत संगमर्मर से बनी यह अदभुत और सुंदर इमारत पूरी दुनिया में प्यार की अविस्मरणीय निशानी के रूप में पहचानी जाती है।

ताजमहल को भारत के मुस्लिम कला के ताज का हीरा माना जाता है, जोकि भारत और मुस्लिम कला के समृद्ध इतिहास का प्रतीक है। प्यार की यह अदभुत मिसाल दुनियां के सात अजूबों में से एक है, जोकि भारत के लिए एक बड़े गर्व की बात है। ताज महल की प्रसिद्धि दुनिया मे इतनी है कि दुनिया के ज़्यादातर लोग जिंदगी में एकबार ताजमहल देखने की चाहत रखते है।

ताजमहल का इतिहास

ताजमहल का निर्माण भारत के पांचवें मुगल शासक शाहजहाँ ने उनकी सबसे प्रिय पत्नी मुमताज़ महल के याद में करवाया था, कहाँ जाता है कि शाहजहाँ और मुमताज़ महल दोनों को जब प्रेम हुआ था तब दोनों की उम्र 14 साल ही थी और फिर बाद में दोनों ने सन 1612 में निकाह कर लिया था।

मुमताज़ महल और शाहजहाँ दोनों एक दूसरे से बहुत ही प्यार करते थे, मुमताज शाहजहाँ की सबसे प्यारी पत्नी हुआ करती थी, लेकिन सन 1631 में अपने 14वें बच्चे को जन्म देते वक्त ही मुमताज़ महल की मृत्यु हो गई। शाहजहाँ चाहते थे कि उनके प्यार को लोगो सालों तक याद रखे, उस लिए शाहजहाँ ने मुमताज़ महल की याद में एक भव्य मकबरा बनाने का निश्चय किया जिसको आज हम लोग ताजमहल के नाम से जानते है जोकि भारत के उत्तरप्रदेश राज्य के आगरा में स्थित है।

सन 1632 में यमुना नदी के तट पर ताजमहल के निर्माण की शुरुआत हुई, ताजमहल के निर्माण कार्य में 22000 से भी ज्यादा लोग ताजमहल के वास्तुकार उस्ताद अहमद लाहौरी के निर्देश अनुसार काम किया करते थे।

22000 से भी ज्यादा लोग और 1000 हाथी हररोज काम करते हुए भी ताजमहल के निर्माण सन 1653 में पूरा हुआ, यानी कि इतने सारे लोग काम करते हुए भी ताजमहल बनाने में पूरे 22 साल लगे थे।

ताजमहल को बनाने के लिए श्वेत संगमर्मर का इस्तेमाल हुआ है, जोकि पूरे भारत, मध्य एशिया और अफ्रीका से लाया गया था, सम्पूर्ण ताजमहल का निर्माण सन1653 में लगभग 320 लाख रुपये की लागत में हुआ था, जिसकी आज की कीमत 52.8 अरब रुपये है।

सन 1983 से यूनेस्को ने ताजमहल को विश्व धरोहर घोषित किया है, ताजमहल को देखने के लिए पूरी दुनिया से हरसाल 80-90 लाख लोग आते है।

वास्तु कला

ताजमहल की रचना में पर्शियन और मुग़ल बांधकाम शैली का बड़ा प्रभाव देखने को मिलता है, ताजमहल पे पौराणिक मुगल बांधकाम हुमायूँ का मकबरा, इत्माद-उद-दूलह, जामा मस्जिद इत्यादि का बहुत ज्यादा प्रभाव देखने को मिलता है। ज्यादातर पौराणिक बांधकाम में लाल बलुआ पत्थर का इस्तेमाल हुआ है, लेकिन ताजमहल में शाहजहाँ के कहने पर श्वेत संगमर्मर का इस्तेमाल किया गया है जोकि ताजमहल की खूबसूरती में चार चाँद लगते है।

मकबरा

सम्पूर्ण ताजमहल का मुख्य केंद्र मुमताज़ महल का मकबरा है, जोकि बड़े संगेमरमर के पत्थरों से बना है उसी वजह से मकबरा लगभग 42 एकड़ में फैला हुआ है। उस मकबरे के ठीक ऊपर बड़ा गुम्बद है, जोकि मकबरे की शोभा में बढ़ोतरी करता है। मकबरे की चारो और बगीचे से घेरी हुए है और मकबरे की चारो मीनार इमारत का चौखट बनती दिखाई देती है।

कलश

ताजमहल में पहले शिखर पर स्थित कलश सोने से बना हुआ था, परंतु अब इसे कांसे से बनाया गया है। यह कलश पर इस्लामिक बनावट के समान चंद की निशानी देखने को मिलती है जिसका एक हिस्सा जन्नत की और इशारा कराया है ऐसा माना जाता है, चंद्र की आकृति और कलश की नोंक मिला कर त्रिशूल का निशान बनाते है जोकि हिन्दू धर्म का दर्शाता है।

मीनार

ताजमहल को चारों और मस्जिद अजान देने के लिए होती है ऐसी मीनार है, हर एक मीनार की ऊंचाई 40 मीटर है और आज मीनारों का निर्माण इस तरह किया ग या है कि वह हल्के बाहर की तरफ जुकी रहती है। ताकि अगर किसी भी परिस्थिति में वह मीनारे गिरते है, तो ताजमहल को ज्यादा नुकसान न पहोंचे।

प्रदूषण का असर

आगरा में काफी सारे कारखाने और बिजली के लिए पावर प्लांट भी स्थित है, जिनके कारण ताजमहल के आसपास का वातावरण बहुत ही प्रदूषित रहता है। वातावरण में ज्यादा प्रदूषण होने की वजह से ताजमहल का रंग अब श्वेत से पीला होने लगा है, जिसके वजह से ताजमहल की जो सच्ची चमक थी वह अब कम होने लगी है।